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Success and Unsuccess Review

People often blame others for their failure. 

This type of problem comes when the person does not want to do his own analysis. 

There can be many reasons for immediate success and failure, but at the root of it, telling others to be its culprit proves its own immaturity. 

We can comfort ourselves by finding such excuses for our own mental satisfaction, but this is nothing more than writing scripts of our own destruction. 

Somewhere at the root of failure, the person is responsible for himself and if he goes ahead by introspecting and correcting his shortcomings, amazing and promising results can be achieved.

We become enlightened scholars to analyze the good and evil of the whole world, but do not use even a fraction of its legitimacy to assess ourselves.

Failure in life is not such a big issue if the reasons and shortcomings of that failure are taken forward by accepting the experience and accepting it as learning. 

A person’s path of failure and destruction is paved only when he immerses himself in the sea of self-realization that he is the best and he has no self-shortage.

To transform failure into success, introspection with complete honesty and accepting its conclusion with positive thinking is necessary and a true fundamental change is necessary.

✍️Tej

हमारा अस्तित्व, हमारी पहचान और हमारा सम्मान कभी भी हमारे शरीर, जाति या हमारे कपड़ों से नहीं होता बल्कि हमारी पहचान और हमारा सम्मान हमारे कार्य, शब्दों के प्रति समर्पण और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के कारण होता है। हम जीवन में जो भी पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक लक्ष्य निर्धारित करते है खासकर तब जबकी किसी संगठन से जुड़े होने पर, अगर उस लक्ष्य को पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ करने में विफल होते है तो समयपरांत संगठन में हमारी विश्वनीयता पर संदेह पैदा होने लगता है क्योंकि लक्ष्य तक पहुंचने में सदैव निष्फल वह व्यक्ति सिर्फ बहाने ढूंढता है और उस जैसे व्यक्तियों के कारण अन्य प्रभुद्ध व्यक्तियों की जवाबदेही भी विफलता के घेरे में आती है।
अगर आप भीड़ का हिस्सा नही बनना चाहते हैं तो अपने शब्दों और लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर उसे सामान्य या असामान्य हर परिस्थिति में प्राप्त करने का जुनून पैदा कीजिये। कहानियां सिर्फ किताबो में अच्छी लगती हैं, वास्तविक जीवन यथार्थ के धरातल पर टिका होता है।

✍️जातीय व्यवस्था अप्रासंगिक है लेकिन धर्म की व्यवस्था कभी भी अप्रांसगिक नही हो सकती एवं होनी भी नही चाहिए। जातीय अव्यवस्था ने सनातन धर्म एवं संस्कृति को कमजोर किया है। वर्ण व्यवस्था कर्म के यथार्थ स्वरूप को परिलक्षित करती थी जिसने समय उपरांत जातीय व्यवस्था का विकृत स्वरूप ले लिया। और इसी अव्यवस्था ने सनातन धर्म को कमजोर कर दिया। समग्र इतिहास के संक्षिप्त अवलोकन के आधार पर यह स्वीकार्यता बढ़ती है कि सनातन धर्म का क्षरण जातीय अव्यवस्था की देन है अन्यथा आर्थिक और सामरिक रूप से सिरमौर यह राष्ट्र सदियो तक क्यो गुलामी का दंश झेलता रहा।
फिर भी इतिहास और वर्तमान के तमाम मतभेदों को क्षीण करते हुए सनातन धर्म में आस्था रखने वाले व्यक्ति को इस धर्म को पुष्ट करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
धर्म अस्तित्व की आत्मा है और अगर आत्मा ही न रहे तो अस्तित्व कहाँ बचेगा।
अगर इस देश में छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर किसी एक संस्कृति का क्षरण हुआ है तो वो सिर्फ सनातन संस्कृति है।
जो भी व्यक्ति इस विचार के साथ खड़ा है कि इस विश्वगुरू राष्ट्र भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी इटालियन की जरूरत है तो निश्चित ही मुझे उसके भारतीय होने पर शक है
जो दृढ़ राखे धर्म को तिहि राखे करतार।

तेजपाल सिंह

Hi Freinds,

Some people live in this world with superficial imaginary world and want success without breaking the comfort zone while some dreamers break the comfort zone and achieve success.

Whatever we work in life and achieve, this is always balanced with input and output. The more the input of passionate hard work poured will glow it’s shining wonderful.

In my views, hard work is always play a key role and control outcomes. Yes there may be different catalyst also that can push outcomes in qualitative and quantitative parameters.

A person who didn’t break his/her comfort zone but even succeed must be Superficial or God’s hand because in real world it doesn’t exist.

Blaming the world, country, government, policy, society and family may have more or less accountability but if someone else could succeed in same society with their dedicated passionate hard work then why people charge and dilute this success with different allegations rather than findings of input behind the real success story.

I can do, you can do and we can do if we dream, Confidence and break the comfort zone then you are also unstoppable.

TEJHPAL SINGH

Go4great.wordpress.com